यह जीवन रंगमंच है । हम देखते है , अपने किरदार के साथ ,ऐसे बहुत से पात्र, जो ,इस रंगमंच का अभिन्न हिस्सा होने के बावजूद सीमाओं में बंधे हैं या बांध दिये गए हैं । समाज को परिभाषित करती , यह हकीकत है ,
ये दूरियाँ , ये फ़ासले ,
कुछ लुटाते हैं , खुशियाँ मनाने में ,
वे लुटते हैं , पेट की भूख मिटाने में ! ©परमजीत कौर