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शिव पुराण - द्वितीय संहिता - रूद्र संहिता - द्वितीय खंड - सती खंड
अध्याय ३१ : आकाशवाणी द्वारा दक्षकी भर्त्सना, उनके विनाशकी सूचना तथा समस्त देवताओंको यज्ञमंडप से निकल जाने की प्रेरणा
Chapter 31: Daksha's condemnation by Akashvani, information about his destruction and inspiration for all the deities to leave the Yagyashaala
अध्याय ३२ : गणोंके मुखसे और नारदसे भी सतीके दग्ध होने की बात सुनकर दक्षपर कुपित हुए शिव का अपनी जटासे वीरभद्र और महाकाली को प्रकट करके उन्हें यज्ञ विध्वंस करने और विरोधीयोंको जला डालने की आज्ञा देना।
Chapter 32: After hearing about the burning of Sati by the mouths of the ganas and Narada also, angry at Daksha, Shiva reveals Veerbhadra and Mahakali from his jata and orders them to destroy the yagya and burn the opponents.
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शिव पुराण - द्वितीय संहिता - रूद्र संहिता - द्वितीय खंड - सती खंड
अध्याय ३१ : आकाशवाणी द्वारा दक्षकी भर्त्सना, उनके विनाशकी सूचना तथा समस्त देवताओंको यज्ञमंडप से निकल जाने की प्रेरणा
Chapter 31: Daksha's condemnation by Akashvani, information about his destruction and inspiration for all the deities to leave the Yagyashaala
अध्याय ३२ : गणोंके मुखसे और नारदसे भी सतीके दग्ध होने की बात सुनकर दक्षपर कुपित हुए शिव का अपनी जटासे वीरभद्र और महाकाली को प्रकट करके उन्हें यज्ञ विध्वंस करने और विरोधीयोंको जला डालने की आज्ञा देना।
Chapter 32: After hearing about the burning of Sati by the mouths of the ganas and Narada also, angry at Daksha, Shiva reveals Veerbhadra and Mahakali from his jata and orders them to destroy the yagya and burn the opponents.
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