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एक अच्छा गाँव । अजेय
एक अच्छे आदमी की तरह
एक अच्छा गाँव भी
एक बहुचर्चित गाँव नहीं होता
अपनी गति से आगे सरकता
अपनी पाठशाला में ककहरा सीखता
अपनी ज़िंदगी के पहाड़े गुनगुनाता
अपनी खड़िया से
अपनी सलेट पट्टी पे
अपने भविष्य की रेखाएँ उकेरता
वह एक गुमनाम क़िस्म का गाँव होता है
अपने कुएँ से पानी पीता
अपनी कुदाली से
अपनी मिट्टी गोड़ता
अपनी फ़सल खाता
अपने जंगल के बियाबानों में पसरा
वह एक गुमसुम क़िस्म का गाँव होता है
अपनी चटाइयों और टोकरियों पर
अपने सपनों की अल्पनाएँ बुनता
अपने आँगन की दुपहरी में
अपनी खटिया पर लेटा
अपनी यादों का हुक्का गुड़गुड़ाता
चुपचाप अपने होने को जायज़ ठहराता
वह एक चुपचाप क़िस्म गाँव होता है
एक अच्छे गाँव से मिलने
चुपचाप जाना पड़ता है
बिना किसी योजना की घोषणा किए
बिना नारा लगाए
बिना मुद्दे उछाले
बिना परचम लहराए
एक अच्छे आदमी की तरह।
By Nayi Dhara Radioएक अच्छा गाँव । अजेय
एक अच्छे आदमी की तरह
एक अच्छा गाँव भी
एक बहुचर्चित गाँव नहीं होता
अपनी गति से आगे सरकता
अपनी पाठशाला में ककहरा सीखता
अपनी ज़िंदगी के पहाड़े गुनगुनाता
अपनी खड़िया से
अपनी सलेट पट्टी पे
अपने भविष्य की रेखाएँ उकेरता
वह एक गुमनाम क़िस्म का गाँव होता है
अपने कुएँ से पानी पीता
अपनी कुदाली से
अपनी मिट्टी गोड़ता
अपनी फ़सल खाता
अपने जंगल के बियाबानों में पसरा
वह एक गुमसुम क़िस्म का गाँव होता है
अपनी चटाइयों और टोकरियों पर
अपने सपनों की अल्पनाएँ बुनता
अपने आँगन की दुपहरी में
अपनी खटिया पर लेटा
अपनी यादों का हुक्का गुड़गुड़ाता
चुपचाप अपने होने को जायज़ ठहराता
वह एक चुपचाप क़िस्म गाँव होता है
एक अच्छे गाँव से मिलने
चुपचाप जाना पड़ता है
बिना किसी योजना की घोषणा किए
बिना नारा लगाए
बिना मुद्दे उछाले
बिना परचम लहराए
एक अच्छे आदमी की तरह।