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वो गुजरा हुआ वक़्त, और वो.... वो जब तन्हाइयों में मेरी, मेरा हमसफ़र हो गई कुछ दूर ही सही-मेरे साथ हो गयी तब, वीरानियां जिंदगी की महफ़िलों में तब्दील हो गयीं कुछ पल के लिये ही सही मैं उसमें और वो मुझमें खो गई ज़िस्म-ओ-जाॅ की सब जंजीरें टूटने को बेताब हो गयीं जब...एक अजनबी हसीना से यूँ ही मुलाक़ात हो गई....
By Dr. Rajnish Kaushikवो गुजरा हुआ वक़्त, और वो.... वो जब तन्हाइयों में मेरी, मेरा हमसफ़र हो गई कुछ दूर ही सही-मेरे साथ हो गयी तब, वीरानियां जिंदगी की महफ़िलों में तब्दील हो गयीं कुछ पल के लिये ही सही मैं उसमें और वो मुझमें खो गई ज़िस्म-ओ-जाॅ की सब जंजीरें टूटने को बेताब हो गयीं जब...एक अजनबी हसीना से यूँ ही मुलाक़ात हो गई....