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तू गुजर गई करीब से
मेरा मयार छोड़ कर मैं डूब गया साकिया मोहब्बत में तेरी तेरा प्यार ओढ़कर ग़ज़ब का इश्क़ है मेरा धड़कनो से तू जाती ही नहीं कहीं तुझे क्या मालूम तेरे सारे दर्द मेरे हिस्से लिए थे मैंने पैमाने तेरी आँखों से जो पिये थे मैने कितने लम्हे रहगुज़र में तेरी जिये थे मैंने पैमाने तेरी आँखों से जो पिये थे मैंने...
क्या क्या गुज़री थी मुझपे जब तुमने मुझको ठुकराया था ऐसे ही दिन दिखलाने को बरसों दिल बहलाया था राख में ख़ाक हुआ था मैं जब खत तुमने मेरा जलाया था वह खत जो दिल था मेरा जिसमें हर लफ्ज मोहब्बत लिखा था मैने इश्क़ ही इश्क़ लिखा था मैने जो खूं से नाम लिखा था मैने जो नाम तुम्हारा लिखा था मैने आखिरी खत था वह मेरा जिसको तुमने जला दिया था फिर धुएं में उसको उड़ा दिया था ....धुएं में उसको उड़ा दिया था....l
कहते हैं कि वक़्त आदतन चीजों को संयमित कर देता है , मगर इंतजार...जो प्यार में होता है किसी का, वह अपनी जगह ढीठ बना रहता है, शून्य और अनंत के बीच फैले रिक्त स्थानो में...यह सोच कर कि तुम आओगी और पढ़़ोगी मेरी आँखों में लिखी वो सारी प्रार्थनाएं, जो ईश्वर से करता रहता हूँ मौन की डोर पकड़ कर...इस ख्याल से भी कि किसी तरह दिल बहल जाये, इन्तज़ार के पल ढल जायें, करार रातों के बेक़रारी में बदल जायें, जादू प्रेम का मेरे तुम्हारे ना आने की जिद पे कुछ यूँ चल जाये..कि ना चाह कर भी तुम पुकार लो मुझे...कि तुम ही से प्यार है...तुम्हारा इंतजार है....
मेरी सांसों में रहती है
मगर आँखों से बहती है मैं तुझ बिन जी नहीं सकता धड़कने मेरी कहती हैं जो मिल जायेंगे मैं और तुम ज़मी जन्नत बनाऊंगा अमीरी हो या फकीरी हो सभी नखरे उठाऊंगा ज़माने भर की हर रौनक तेरे कदमो में लगाऊंगा कहेंगे लोग पागल जो गुज़र हद से भी जाऊँगा मरे सीने से लग के बस इतना सा ही कह दे तू मैं तेरी हूँ मै तेरी हूँ मैं तेरी हूँ..........
Meri aankho me tairte hain Vo sare Khwab aaj bhi Jo dekhe the haseen vakt ki panah me hamne Socha tha ki nadi ki do dhar hain ham door tk bahenge Mil kr sagar me bhi sang hi rahenge Magar sakhat vakt aur kudrat k ek prahar ne pahle dard diya fir juda kiya fir jivan ka naksh hi badal diya Pal do pal sath chal hamara hr khwab kuchal diya.. ...aur fir.....ek yahan rah gaya-ek vahan chal diya...
तू वो ग़ज़ल है मेरी
जिसमें तेरा होना तय है तू वो नज्म है मेरी जिसमें आज भी तेरी मौजूदगी तय है इसलिये नहीं... कि... तू मेरी दस्तरस में है बल्कि इसलिये...कि... तू आज भी मेरी नस - नस में है इसलिए हो चाहे ये कितना ही लंबा सफ़र ना थकेगा ना रुकेगा ये कारवाँ ना छूटेगी ये डगर क्यों कि... तेरा मेरा है प्यार अमर.....।
तू वो ग़ज़ल है मेरी
जिसमें तेरा होना तय है तू वो नज्म है मेरी जिसमें आज भी तेरी मौजूदगी तय है इसलिये नहीं... कि... तू मेरी दस्तरस में है बल्कि इसलिये...कि... तू आज भी मेरी नस - नस में है इसलिए हो चाहे ये कितना ही लंबा सफ़र ना थकेगा ना रुकेगा ये कारवाँ ना छूटेगी ये डगर क्यों कि... तेरा मेरा है प्यार अमर.....।भीगे लम्हों के इश्क़ का, बस इतना सा फ़साना है l मिलन लाज़िमी है दीवानों का,, मौसम तो एक बहाना है ll ...ये उन दिनों की बात है, जब बादलों की चादर ओढ़कर दिन रात यूं ही गुजर रहे थे, फिर हुआ यूं कि एक दिन एक शाम ऐसी भी आयी...जब मैं और वो यानि..... भीगे भीगे दो मन - दो बदन बदन की वो अगन जिंदगी की हर उलझन से दूर जवानी में चूर बारिश की मस्ती में मगन सावन की वो पहली बारिश बूँदों की वो मदभरी चुभन होश खो चुके थे दो यौवन जब गिर रहा था आसमाँ से रिमझिम....वो सावन...
वो गुजरा हुआ वक़्त, और वो.... वो जब तन्हाइयों में मेरी, मेरा हमसफ़र हो गई कुछ दूर ही सही-मेरे साथ हो गयी तब, वीरानियां जिंदगी की महफ़िलों में तब्दील हो गयीं कुछ पल के लिये ही सही मैं उसमें और वो मुझमें खो गई ज़िस्म-ओ-जाॅ की सब जंजीरें टूटने को बेताब हो गयीं जब...एक अजनबी हसीना से यूँ ही मुलाक़ात हो गई....
वो तरकीब कहाँ से लाऊं जो अतीत को हमारे मेरे दिल से मिटा दे वो मरहम कहाँ से लाऊं जो रिसते हुए ज़ख्मों को सुखा दे वो दिल कहाँ से लाऊं तेरी याद जो मिटा दे
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