Pratidin Ek Kavita

Ek Bosa | Kaifi Azmi


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एक बोसा | कैफ़ी आज़मी


जब भी चूम लेता हूँ उन हसीन आँखों को

सौ चराग अँधेरे में जगमगाने लगते हैं


फूल क्या शगूफे क्या चाँद क्या सितारे क्या

सब रकीब कदमों पर सर झुकाने लगते हैं


रक्स करने लगतीं हैं मूरतें अजन्ता की

मुद्दतों के लब-बस्ता ग़ार गाने लगते हैं


फूल खिलने लगते हैं उजड़े उजड़े गुलशन में

प्यासी प्यासी धरती पर अब्र छाने लगते हैं


लम्हें भर को ये दुनिया ज़ुल्म छोड़ देती है

लम्हें भर को सब पत्थर मुस्कुराने लगते हैं.

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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio