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एक साहुकार हो, बींक टाबर टूबर कोई कोनी हो । माह को महिनो आयो। लुगाया चौथ की पूजा करण बैठी । बाबठ चली गयी । लुगायां न बोली कि थे कांई करो ? बे बोली, म्हे चौथ माता की पूजा करां । ई सू कांई हुव। लुगायां बोली, अनपुत्रा न पुत्र हुवे, बिछडया को मेंल हुव, अन्न धन हुब, चौथ माता सुवाग देव ।
एक बार विनायकजी टावर बन्योडा चिमटी म चांवल चिमचा म दूध लेर गांव म फिरया कोई खीर रांध दयो । लुगायां कहयो महाराज म्हान फुरसत कोनी ।
हमारे हिंदू धर्म ग्रंथो मे सुबह के स्नान को चार उपनामो के रूप मे बताया गया है
एक छोटो सो छोरो आपका घरां से लड़ कर निकलगो और बोल्यो कि आज तो बिन्दायकजी स मिलकर ही घरां पाछो जाऊँगा ।
हत्थाजोड़ी, एक पौधे की अत्यंत दुर्लभ जड़ है । जिसे महाकाली और कामख्या देवी का रूप माना जाता है ।
एक गणेशजी हा, न्हा धोकर, राजा का डावा गोखा म भार बैठ जवता । राजा की सवारी निकलती, जणा, पूछतो थे अठ ही अठ बेठो हो, थांक भी की काम ह की नहीं ।
एक तपस्वी हो । रोज तपस्या करतो । नारद जी वीणा बजाता बजाता आया नारद जी बोल्या तप्या तपी ह क लौभी ह ?
इस घटना के बाद बामाखेपा की अलौकिकता के बारे में लोगों को पता लगा। धीरे-धीरे लोगों की भीड़ बामाखेपा की तारा पीठ में बढ़ने लगी। कोई बीमार आता तो बामाखेपा उस पर हाथ फेर देते तो वह स्वस्थ हो जाता। निसंतानों को संतान की प्राप्ति हो जाती। सभी आगंतुकों की इच्छा और मनोकामना तारापीठ में पूरी होने लगी।
महावर लगे सुंदर पैरों में पायल पहने हुए, खुले हुए कमर तक बिखरे केश से युक्त, परम ब्रह्मांड की स्वामिनी, सौंदर्य की प्रतिमूर्ति। नील वर्णी, मंद मंद मुसकाती माँ तारा, वामाखेपा के सामने खड़ी थीं…….
कांतारा मूवी मे पनजूरली देवता का जिक्र किया गया है | आखिर ये पनजूरली देवता है कौन ? और ये किसके अवतार है ? आज हम इसके बारे मे बात करेगे |
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