"बारिश "-
गर "वह "बारिश ना होती ,
तो" तुम "भी ना होते ,
"हम "भी ना होते .
ना वह धरती भिगोती,
ना अंबर को चुमती,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता .
पेड पत्ते ना होते ,
ना नदिया वो बेहती ,
ना समंदर बेहकता ,
वह बुंदे ना होती तो कुछ भी ना होता ,
ना साहिल तरसाता ना मझंधार होती,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता.
ना भीगना; भीगाना ,
ना चुनर से ढ़कना,
ना किताबो और हातो से सर को छूपाना ,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता .
ना छाता, ना चष्मा कुछ भी ना भिगता ,
ना वायपर कि जरुरत ,
ना रेनकोट खरीदना ,
वह बारिश ना होती;
तो कुछ भी ना होता .
वह चाय कि प्याली ,
वह बाते पुरानी,
वह गाने पुराने सुनने के बहाने ,
वह बारिश ना होती;
तो कुछ भी ना होता.
वह कश्ती ;वह तिनका ,
वह मोर का नाचना ,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता.
ना सडको का भिगना ,
ना नालोका जमना,
हसते -हसाते हमारा यो सफर करना ,
ना गिले ना शिकवे का उभरना ,
ना आसू ना अरमानो का चेहेकना ,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता .
ना कुछ याद आता,
ना कुछ भूल पाते ,
बेहकना संभालना ,
भी मुमकिन ना होता ,
वह बारिश ना होती;
तो कुछ भी ना होता .
ना हवाओ का चलना यू बेताब करता ,
ना आंधी गरजती ना तुफान आता ,
"वजह "कुछ भी हो पर यु बेकरार होना ,
वह बारिश ना होती ;
तो कुछ भी ना होता.
ना मन यू पिघलता,
ना जमी यू मेहेकती ,
ना टपकती ये बुन्दे ,
ना पत्ते यो झड़ते ,
ना बालोके लट पे
कोई ऐब होता ,
वह बारिश ना होती;
तो कुछ भी ना होता .
ना थर्राना बिजलिसे ,
ना आके लीपटना ,
वह बारिश ना होती;
तो कुछ भी ना होता.
ना गमके आसू बुन्दो मे छूपाना ,
ना बारिश के बुन्दो मे खुशिसे नहाना ,
मोहोब्बत में उतनी कशिश भी ना होती ,
राह देखने में वह मजा भी ना आता ,
वह बारिश ना होती तो ,
कुछ भी ना होता ;
"तुम "-" तुम "ही ना होते
"हम "-" हम "भी ना होते.-
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Founder,CEO Eschoolforall;Eclinicsforall.