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फ़िलवक़्त जहाँ हूँ। पारुल पुखराज
जाना है
जहाँ
हो रही मेरी प्रतीक्षा
लौटना है
फ़िलवक़्त जहाँ हूँ
होने की जगह मेरे
असंख्य नेवलों का वास है
संभव है वे
लुक-छिप साथ जाएँ
निगलने प्रतीक्षा को
मेरी अनुपस्थिति में जो
फन काढ़ती है
अक्सर
By Nayi Dhara Radioफ़िलवक़्त जहाँ हूँ। पारुल पुखराज
जाना है
जहाँ
हो रही मेरी प्रतीक्षा
लौटना है
फ़िलवक़्त जहाँ हूँ
होने की जगह मेरे
असंख्य नेवलों का वास है
संभव है वे
लुक-छिप साथ जाएँ
निगलने प्रतीक्षा को
मेरी अनुपस्थिति में जो
फन काढ़ती है
अक्सर