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गीता महायज्ञ के ९वें दिन गीता के ज्ञान-विज्ञान योग नामक ७वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान् अपने वास्तविक तत्व का परिचय देते हैं। वे कहते हैं की वे अपने परिचय के अलावा अपने साक्षात्कार का तरीका भी बताएँगे जिस ज्ञान से मनुष्य सभी चीज़ों का मूल राशि जान जायेगा। इसके लिए वे अपनी दो प्रकार की प्रकृति के ज्ञान से प्रारम्भ करते हुए बताते हैं की एक है अपरा और दूसरी है परा प्रकृति। वे खुद इन दोनों प्रकृति के आधार हैं। अपने इस तत्त्व को बता कर वे विज्ञानं के तरीके में मूल रूप से भक्ति की चर्चा करते हैं।
By Vedanta Ashramगीता महायज्ञ के ९वें दिन गीता के ज्ञान-विज्ञान योग नामक ७वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान् अपने वास्तविक तत्व का परिचय देते हैं। वे कहते हैं की वे अपने परिचय के अलावा अपने साक्षात्कार का तरीका भी बताएँगे जिस ज्ञान से मनुष्य सभी चीज़ों का मूल राशि जान जायेगा। इसके लिए वे अपनी दो प्रकार की प्रकृति के ज्ञान से प्रारम्भ करते हुए बताते हैं की एक है अपरा और दूसरी है परा प्रकृति। वे खुद इन दोनों प्रकृति के आधार हैं। अपने इस तत्त्व को बता कर वे विज्ञानं के तरीके में मूल रूप से भक्ति की चर्चा करते हैं।