पू.गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज के महाशिवरात्रि ज्ञान-भक्ति शिविर पर आयोजित वेदान्त शिविर में श्रीमद्भगवद गीता के पुरुषोत्तम योग नामक पन्द्रवें अधयाय पर अपने प्रवचनों की श्रंखला के नवें प्रवचन में अध्याय के पन्द्रवें श्लोक का विस्तृत चिंतन करके, अंतिम प्रसंग में प्रवेश करते हुए १६वें से १८वें श्लोक का पाठ किया था।