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सम्पूर्ण भगवद-गीता के महायज्ञ की प्रवचन श्रंखला के दूसरे दिन वेदान्त आश्रम, इंदौर के पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने अपनी भूमिका के दूसरे प्रवचन में बताया कि भगवद गीता धर्म के निर्णय में असमर्थ अर्जुन के लिए उपदेश था। उसके साथ-साथ जो भी अर्जुन स्थानीय जीव हैं उन सबको अपने अनिर्णय के संकट से उभरने हेतु उपदेश है। इस लिए यह समस्त मानव मात्र के लिए उपयोगी और प्रासंगिक है। महाभारत की भूमिका बताते हुए पूज्य श्री ने हस्तिनापुर के परिवार की स्थिति बताई और किस तरह से यह युद्ध पांडवों पर थोप दिया गया था। इस परिस्थिति में लड़ने के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अर्जुन एक धर्म-प्रिय और निष्ठ व्यक्ति था इसलिए उसके मन में एक व्यथा उत्पन्न हुई - जिसको निमित्त बनाकर गीतोपदेश प्रदान किया गया।
By Vedanta Ashramसम्पूर्ण भगवद-गीता के महायज्ञ की प्रवचन श्रंखला के दूसरे दिन वेदान्त आश्रम, इंदौर के पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने अपनी भूमिका के दूसरे प्रवचन में बताया कि भगवद गीता धर्म के निर्णय में असमर्थ अर्जुन के लिए उपदेश था। उसके साथ-साथ जो भी अर्जुन स्थानीय जीव हैं उन सबको अपने अनिर्णय के संकट से उभरने हेतु उपदेश है। इस लिए यह समस्त मानव मात्र के लिए उपयोगी और प्रासंगिक है। महाभारत की भूमिका बताते हुए पूज्य श्री ने हस्तिनापुर के परिवार की स्थिति बताई और किस तरह से यह युद्ध पांडवों पर थोप दिया गया था। इस परिस्थिति में लड़ने के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अर्जुन एक धर्म-प्रिय और निष्ठ व्यक्ति था इसलिए उसके मन में एक व्यथा उत्पन्न हुई - जिसको निमित्त बनाकर गीतोपदेश प्रदान किया गया।