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आज हिमालय जगा रहा है तुम्हें, जागो-जागो मेरे लाल
मत करने दो नीलाम मुझे, मत होने दो मेरा हलाल।
पत्थर बेचे, मिट्टी बेची, बेचे जंगल हरे बांज के, लीसा गडाण के घाव से, दी गई खाल मेरी उतार
संगीत-गीत सब बेच दिए, मेरे इन सुमधुर कंठों का सुर बेच दिया…. सब बेच दिया ठंडा पानी, ठंडी बयार
चलन आज का नहीं, पुराना है उनका, छानेंगे इतिहास तो आपको यही मिलेगा… जिसको भी कांधे बैठाया हमने, वही काल बन गए हमारे, यही इतिहास कहेगा
By Nakshatra Pandeyआज हिमालय जगा रहा है तुम्हें, जागो-जागो मेरे लाल
मत करने दो नीलाम मुझे, मत होने दो मेरा हलाल।
पत्थर बेचे, मिट्टी बेची, बेचे जंगल हरे बांज के, लीसा गडाण के घाव से, दी गई खाल मेरी उतार
संगीत-गीत सब बेच दिए, मेरे इन सुमधुर कंठों का सुर बेच दिया…. सब बेच दिया ठंडा पानी, ठंडी बयार
चलन आज का नहीं, पुराना है उनका, छानेंगे इतिहास तो आपको यही मिलेगा… जिसको भी कांधे बैठाया हमने, वही काल बन गए हमारे, यही इतिहास कहेगा