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July 19, 2021हां मै खोयी हूँ !!1 minutePlayरोती तो नही हूँ, बस मुस्कुराना भूल गयी हूँ।पहले की तरह अब मैं जीना भूल गयी हूँ।जाने किस बात की सोच में खोई सी रहती हूं...खामोश रहने लगी हूँ, बक बक भूल गयी हूँ।लोगो से अब दिल मेरा शिकायत तक नही करता...कोई है भी क्या अपना,में ये भी भूल गयी हूँ।सहम सी गयी हूं मैं अंदर से....न जाने क्यों में एक अर्शे से खुल के हंसना भूल गयी हूँ।दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो मेरा,जब से टूटी हूँ.. ख्वाब सजाना भूल गयी हूँ।।...moreShareView all episodesBy Our voiceJuly 19, 2021हां मै खोयी हूँ !!1 minutePlayरोती तो नही हूँ, बस मुस्कुराना भूल गयी हूँ।पहले की तरह अब मैं जीना भूल गयी हूँ।जाने किस बात की सोच में खोई सी रहती हूं...खामोश रहने लगी हूँ, बक बक भूल गयी हूँ।लोगो से अब दिल मेरा शिकायत तक नही करता...कोई है भी क्या अपना,में ये भी भूल गयी हूँ।सहम सी गयी हूं मैं अंदर से....न जाने क्यों में एक अर्शे से खुल के हंसना भूल गयी हूँ।दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो मेरा,जब से टूटी हूँ.. ख्वाब सजाना भूल गयी हूँ।।...more
रोती तो नही हूँ, बस मुस्कुराना भूल गयी हूँ।पहले की तरह अब मैं जीना भूल गयी हूँ।जाने किस बात की सोच में खोई सी रहती हूं...खामोश रहने लगी हूँ, बक बक भूल गयी हूँ।लोगो से अब दिल मेरा शिकायत तक नही करता...कोई है भी क्या अपना,में ये भी भूल गयी हूँ।सहम सी गयी हूं मैं अंदर से....न जाने क्यों में एक अर्शे से खुल के हंसना भूल गयी हूँ।दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो मेरा,जब से टूटी हूँ.. ख्वाब सजाना भूल गयी हूँ।।
July 19, 2021हां मै खोयी हूँ !!1 minutePlayरोती तो नही हूँ, बस मुस्कुराना भूल गयी हूँ।पहले की तरह अब मैं जीना भूल गयी हूँ।जाने किस बात की सोच में खोई सी रहती हूं...खामोश रहने लगी हूँ, बक बक भूल गयी हूँ।लोगो से अब दिल मेरा शिकायत तक नही करता...कोई है भी क्या अपना,में ये भी भूल गयी हूँ।सहम सी गयी हूं मैं अंदर से....न जाने क्यों में एक अर्शे से खुल के हंसना भूल गयी हूँ।दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो मेरा,जब से टूटी हूँ.. ख्वाब सजाना भूल गयी हूँ।।...more
रोती तो नही हूँ, बस मुस्कुराना भूल गयी हूँ।पहले की तरह अब मैं जीना भूल गयी हूँ।जाने किस बात की सोच में खोई सी रहती हूं...खामोश रहने लगी हूँ, बक बक भूल गयी हूँ।लोगो से अब दिल मेरा शिकायत तक नही करता...कोई है भी क्या अपना,में ये भी भूल गयी हूँ।सहम सी गयी हूं मैं अंदर से....न जाने क्यों में एक अर्शे से खुल के हंसना भूल गयी हूँ।दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो मेरा,जब से टूटी हूँ.. ख्वाब सजाना भूल गयी हूँ।।