Pratidin Ek Kavita

Haar Na Apni Manunga Main | Gopaldas Neeraj


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हार न अपनी मानूँगा मैं !। गोपालदास "नीरज"


चाहे पथ में शूल बिछाओ

चाहे ज्वालामुखी बसाओ,

किन्तु मुझे जब जाना ही है -

तलवारों की धारों पर भी, हँस कर पैर बढ़ा लूँगा मैं !

 

मन में मरू-सी प्यास जगाओ,

रस की बूँद नहीं बरसाओ,

किन्तु मुझे जब जीना ही है -

मसल-मसल कर उर के छाले, अपनी प्यास बुझा लूँगा मैं !


हार न अपनी मानूंगा मैं !

 

चाहे चिर गायन सो जाए,

और ह्रदय मुर्दा हो जाए,

किन्तु मुझे अब जीना ही है -

बैठ चिता की छाती पर भी, मादक गीत सुना लूँगा मैं !


हार न अपनी मानूंगा मैं !

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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio