"मेरे बेटे, मैंने तुम्हारे झूठ के लिए ही तुम्हारी पिटाई की। झूठ- यह भूल नहीं, संयोग से होने वाली बात नहीं, यह हमारे चरित्र का एक लक्षण है, जो जड़ जमा सकता है। यह तुम्हारी आत्मा के खेत में भयानक जंगली घास है। अगर उसे वक्त पर न उखाड़ फेंका जाए, तो वह सारे खेत में फैल जाएगी और अच्छे बीज के फूट निकलने की कहीं भी जगह नहीं बचेगी। झूठ से ज़्यादा ख़तरनाक और कोई चीज़ इस दुनिया में नहीं है। इससे पिंड छुड़ाना मुमकिन नहीं होता।" -रसूल हमज़ातोव, मेरा दागिस्तान।