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This is a audio of Hanuman Chalisa . This Hanuman Chalisa audio is given by my own voice.
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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
जय हनुमान ज्ञान गुन…
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।