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गर्दिश में कुछ, गुमनाम सी, गुस्ताख़ हकीक़त,
अनकहे, अल्फ़ाज़ के, अस्बाब हकीक़त।
ज़मी पे तू, है आसमां तेरे आईने में,
ज़फ़र मिलती नहीं फ़रियाद से, बे-दाद हकीक़त।।
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By Ayan Sharmaगर्दिश में कुछ, गुमनाम सी, गुस्ताख़ हकीक़त,
अनकहे, अल्फ़ाज़ के, अस्बाब हकीक़त।
ज़मी पे तू, है आसमां तेरे आईने में,
ज़फ़र मिलती नहीं फ़रियाद से, बे-दाद हकीक़त।।
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