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उदासी भरी शाम थी और खोज रही थी की कुछ ऐसा मिल जाये जिसे पढ़कर उदासी की गाँठ खुल जाये और मुंह से “उफ़्फ़” के सिवा कुछ ना निकले !
“हरि हरिल “ की इन पंक्तियों ने ये काम किया :)
आप भी सुनिए :)
By jyotika badyalउदासी भरी शाम थी और खोज रही थी की कुछ ऐसा मिल जाये जिसे पढ़कर उदासी की गाँठ खुल जाये और मुंह से “उफ़्फ़” के सिवा कुछ ना निकले !
“हरि हरिल “ की इन पंक्तियों ने ये काम किया :)
आप भी सुनिए :)