Pratidin Ek Kavita

Hum Aur Log | Kedarnath Agarwal


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हम ओर लोग  | केदारनाथ अग्रवाल 


हम

बड़े नहीं

फिर भी बड़े हैं

इसलिए कि

लोग जहाँ गिर पड़े हैं

हम वहाँ तने खड़े हैं

द्वन्द की

लड़ाई भी

साहस से लड़े हैं;

न दुख से डरे,

न सुख से मरे हैं;

काल की मार में

जहाँ दूसरे झरे हैं,

हम वहाँ अब भी

हरे-के-हरे हैं।

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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio