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हम रोते थोड़ी हैं पागल । प्रदीप अवस्थी
हमारे हिस्से आईं जो उदासियाँ
गले तक भर आए जो दुख के घड़े
जला गया आँखों को जो गरम पानी
और जो कहानियाँ बनाईं अपने दिमाग़ में
जिनमें हम सबसे उत्पीड़ित किरदार
तुम्हें बाँहों में भरते ही गलेगा सब
हम रोते थोड़ी हैं पागल
ये तो बस तस्वीरें अय्यारी करती हैं।
By Nayi Dhara Radioहम रोते थोड़ी हैं पागल । प्रदीप अवस्थी
हमारे हिस्से आईं जो उदासियाँ
गले तक भर आए जो दुख के घड़े
जला गया आँखों को जो गरम पानी
और जो कहानियाँ बनाईं अपने दिमाग़ में
जिनमें हम सबसे उत्पीड़ित किरदार
तुम्हें बाँहों में भरते ही गलेगा सब
हम रोते थोड़ी हैं पागल
ये तो बस तस्वीरें अय्यारी करती हैं।