मर्यादा का मंथन: जब प्रतिनिधि ही लांघ जाए सीमाएं
विधानसभा जैसी गरिमामयी जगह पर जब हमारे जनप्रतिनिधि मर्यादा की सारी रेखाएं पार कर दें, तो सवाल उठाना लाज़िमी हो जाता है। यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। जब लहजा तीखा हो जाए और भाषा में शालीनता खो जाए, तब जनता को तय करना होता है कि असल में गलती किसकी है — नेताओं की, सिस्टम की या हमारी खामोशी की?
“जब सवाल पूछने वालों को ही अपमानित किया जाए, तो क्या लोकतंत्र की आत्मा जिंदा रह पाती है?”
• क्या नेता अब सत्ता के नशे में शालीनता को कमजोरी मानने लगे हैं?
• विपक्ष और सत्ता दोनों में गरिमा की जगह क्या पूरी तरह खत्म हो गई है?
• क्या ये घटनाएं सिर्फ राजनीति का हिस्सा हैं या एक बड़ी सामाजिक गिरावट का संकेत?
• मीडिया को क्या इन मुद्दों पर गहराई से सवाल नहीं पूछना चाहिए?
Agenda Points:
• विधानसभा में घटित घटनाओं का असली सच
• मर्यादा बनाम राजनीति — कौन ज़िम्मेदार?
• जनता के सामने नेताओं की दोहरी छवि
• लोकतंत्र में अनुशासन का भविष्य
Host:
योगीराज योगेश जी
Panelists:
डॉ. प्रेम व्यास जी — मीडिया पैनलिस्ट, मध्यप्रदेश भाजपा
राहुल राज जी — प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस
रंजन श्रीवास्तव जी — वरिष्ठ पत्रकार
सुनिए पूरा पॉडकास्ट: https://pod.link/1772547941
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