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"हमारे समाज में इंसान को इंसान बाद में पहले स्त्री या पुरुष समझा जाता है।" प्राचीन काल से ही इस समाज में एक स्त्री व पुरुष के लिए अलग-अलग मानदंड स्थापित हैं। खिलौनों से लेकर बड़े होकर लिए जाने वाले फैसलों तक सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप लड़का हैं या लड़की ।
आज इस पॉडकास्ट के माध्यम से दिव्या व समीक्षा इन्हीं जेंडर स्पेसिफिक नॉर्म्स पर चर्चा कर हमें बताएँगें कि किस तरह ये जेंडर स्पेसिफिक नॉर्म्स बचपन से लेकर बड़े होने तक एक इंसान की जिंदगी को सिर्फ प्रभावित ही नहीं करते बल्कि तबाह करके रख देते हैं |
आइए विचारों की इस खिड़की से झाँकें हमारे समाज की असलियत!
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By Hindi Sahitya Sabha, SRCC"हमारे समाज में इंसान को इंसान बाद में पहले स्त्री या पुरुष समझा जाता है।" प्राचीन काल से ही इस समाज में एक स्त्री व पुरुष के लिए अलग-अलग मानदंड स्थापित हैं। खिलौनों से लेकर बड़े होकर लिए जाने वाले फैसलों तक सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप लड़का हैं या लड़की ।
आज इस पॉडकास्ट के माध्यम से दिव्या व समीक्षा इन्हीं जेंडर स्पेसिफिक नॉर्म्स पर चर्चा कर हमें बताएँगें कि किस तरह ये जेंडर स्पेसिफिक नॉर्म्स बचपन से लेकर बड़े होने तक एक इंसान की जिंदगी को सिर्फ प्रभावित ही नहीं करते बल्कि तबाह करके रख देते हैं |
आइए विचारों की इस खिड़की से झाँकें हमारे समाज की असलियत!
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