Pratidin Ek Kavita

Intezaar | Padma Sachdev


Listen Later

इंतज़ार ।  पद्मा सचदेव


फागुन की डयौढ़ी के आगे


लग गया पहाड़ सूखी पत्तियों का

कोई पत्ता सीधा कोई गोल-सा हुआ पड़ा


कोई धीरे-धीरे ले रहा है साँस

कोई लगता है यूँ बिल्कुल मरा-सा


टहनियों पर नए फूल

आने को आतुर बड़े


हरी टहनियों के ऊपर जैसे हों मोती जड़े

खुलेगी जब कली आ ही जाएँगे


मुट्ठी बंद, बंद आँख, बंद होंठ

सब ही तो खुल जाएँगे


छोटे-छोटे हाथ पाँव, बाँह और छोटा-सा पेट

खिलेगी पूरी बहार


फागुन भी करता इसी का इंतज़ार

...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio