Pratidin Ek Kavita

Itvaar | Anup Sethi


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इतवार | अनूप सेठी


आओ इतवार मनाएँ

देर से उठें

चाय पिएँ

और चाय पिएँ

अख़बार को सिर्फ़ उलट पलट लें

हाथ न लगाएं

सिर्फ़ चाय का गिलास घुमाएँ


किसी को न बुलाएँ

नहाना भी छोड़ दें

खाना अकेले खाएँ


बाजार खरीदारी स्थगित कर दें अगले हफ्ते तक

केरोसिन ले लें दस रुपए ज़्यादा  देकर


एक पुरसुकून दोपहर हो

ढीलमढाल पसरे रहें


पुरानी एलबम निकालें

पहली सालगिरह याद करें

बातें करें

बचपन की, कालेज की, नाटक की कविताई की


सारे सपनों की धूल झाड़ें

बिस्तर के इर्द गिर्द बिछा लें

इतवार की शाम

आँखों में आँखें डाल सो जाएँ


एक इतवार तो हो

अपने से बाहर निकल

अपने में खो जाएँ।


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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio