
Sign up to save your podcasts
Or


जिसकी भुजाओं ने स्वयं कैलाश उठाया है,
तीनों लोकों का प्रत्येक प्राणी भी, जिसके बाहुबल से थर्राया है,
उस जैसा तेजस्वी और ताकतवर योद्धा, संसार में न दूजा है,
अपने शीशों को जिसने काट काट, महाकाल को पूजा है।
यह कहानी है भक्ति, आस्था, छल और अहंकार की..
यह है “कहानी रावण की”
From the publisher's feed