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कुछ लोग डर फैलाते हैं। कुछ लोग डर बेचते हैं। और कुछ…डर को सुनते हैं।”
“और जो डर सुनने लगे…उसे रोकना पड़ता है।”
रीमा की गूंजती आवाज़
"अब आखिरी चक्र है, बोपुल। अब तुम खुद चल कर आए हो। बलि पूरी होगी।"
बोपुल (आगे बढ़ता है): "नहीं रीमा, बलि नहीं... सच्चाई पूरी होगी।"
बोपुल (धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए):
"तीन शव, एक जैसे चिह्न, कुछ कुछ अलग से!
और चौथी बलि वो, जिसने मुझे केस की शुरुआत में ही सही सुराग दिए?
इतनी सफाई से जाल कौन बुन सकता है?"
रितु:
"हाथ में बंधा ये काला धागा… बिल्कुल आम नहीं है। इसमें मुरमुरे और नींबू की गांठें बंधी हैं।"
बोपुल:
"ये तांत्रिक विधि का हिस्सा है — ‘शव-साधना’।
शव की ऊर्जा को कैद करने के लिए ये टोटका होता है। लेकिन सवाल ये है कि किसने की?"
"कुछ लोग सच ढूंढते हैं, कुछ लोग झूठ से लड़ते हैं.
और कुछ लोग — खुद अंधेरे में उतरकर, दूसरों की रौशनी वापस लाते हैं। "
बोपुल बागची!
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