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August 26, 2021कबीर दास जी के दोहे 11Playअति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।...moreShareView all episodesBy RJ PRASUNAugust 26, 2021कबीर दास जी के दोहे 11Playअति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।...more
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।
August 26, 2021कबीर दास जी के दोहे 11Playअति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।...more
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।