तुम्हारा कोई कहानी सुनने का दिल करे, तो इस दफ़ा छुट्टियों में ज़रा वक़्त निकाल के आना। किसी कच्ची सड़क पर टहलते हुए, किसी शाम सूरज को ढलते देखते हुए, किसी पेड़ की छाया तले। ढूंढोगे तो मैं मिलूंगी ज़रूर, अपना संदूक उठाये हुए, अपनी कहानी सुनाते हुए।
तुम्हारा कोई कहानी सुनने का दिल करे, तो इस दफ़ा छुट्टियों में ज़रा वक़्त निकाल के आना। किसी कच्ची सड़क पर टहलते हुए, किसी शाम सूरज को ढलते देखते हुए, किसी पेड़ की छाया तले। ढूंढोगे तो मैं मिलूंगी ज़रूर, अपना संदूक उठाये हुए, अपनी कहानी सुनाते हुए।