Modern Masters

खनकती चुभन तुम्हारे न होने की


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जैसे बरसती हो
बेनाम बे आवाज़ बारिश
किसी भूले सागर के
धुँधले कोने में
जैसे फैलती हो
अनमनी सी कस्तूरी
किसी अनछुए जंगल के
कँवारे सन्नाटे में
जैसे सुलगती हो
पराई सी चाँदनी
किसी अनजान आकाशगंगा के
मौन झूलते अकेलेपन में
वैसे ही तुम्हारा न होना
भर देता है मुझे
उस बिना जिए ख़ालीपन की
खनकती चुभन से
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Modern MastersBy Dhiraj