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किताबें । लक्ष्मीकांत मुकुल
कितनी रहस्य भरी है किताबों की दुनिया
पन्नों के बीच दबे मोर-पंख
याद दिलाते हैं बचपन के कच्चे प्यार
उनके लिखित उतरते जाते हैं हौले से
आत्मा की गहवर में
उसके विस्तृत फैलाव में गुम हो जाती है
हमारी कूप मंडुकता!
By Nayi Dhara Radioकिताबें । लक्ष्मीकांत मुकुल
कितनी रहस्य भरी है किताबों की दुनिया
पन्नों के बीच दबे मोर-पंख
याद दिलाते हैं बचपन के कच्चे प्यार
उनके लिखित उतरते जाते हैं हौले से
आत्मा की गहवर में
उसके विस्तृत फैलाव में गुम हो जाती है
हमारी कूप मंडुकता!