ये उपन्यास बाबू देवकीनंदन खत्री जी द्वारा रचित हैं। ये उपन्यास एक ऐसे राजा पर आधारित है जिसे वहा की रियाया पसंद नहीं करती। बीरसिंह नाम का दीवानेखास राजा के बेटे के खून मे गिरफ्तार होता है। राजा अपने बेटे के कातिल को कातिल नही मानता क्योंकि बिरसिंह को उसने अपने बेटे जैसे पाला है। फिर आख़िर क्या कारण है जो बीरसिंह ने 10 साल के बच्चे की जान ले ली क्या राजा की रियाया इस बात को मानेगी या बीरसिंह निर्दोष साबित होगा जाने इस उपन्यास में ,