StorywithNeety

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  • अलिफ लैला
    इस गीत को बचपन में हम सब ने कई बार दूरदर्शन के धारावाहिक अलिफ़ लैला में अवश्य ही सुना होगा।अलिफ लैला की कहानी अरब देश की एक प्रचलित लोक कथा है जो पूरी दुनिया में सदियों से सुनी व पढ़ी जाती रही है। 'अलिफ लैला' भारत में अपने अरबी नाम "अल्फ लैला" के प्रचलित बिगड़े हुए रूपके नाम से अधिक जाना जाता है। अरबी में अल्फ का अर्थ है एक हजार और लैला का अर्थ है रात।
    यह हज़ार कहानियों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है, जिसमें प्रत्येक कहानियां एक फूल की तरह है। इन कहानियों में प्यार, सुख, दुःख, दर्द, धेखा, बेवपफाई, ईमानदारी, कर्तव्य, भावनाएं जैसे भावों का अद्भुत संतुलन है, जिसको पाठकों और श्रोताओं को हमेशा लुभाया है।
    दसवीं शताब्दी ईस्वी के अरब लेखक और इतिहासकार मसऊदी के अनुसार अल्फ लैला की कथामाला का आधार फारसी की प्राचीन कथामाला 'हजार अफसाना' है। अल्फ लैला की कई कहानियाँ जैसे 'मछुवारा और जिन्न' 'कमरुज्जमा और बदौरा' आदि कहानियाँ सीधे 'हजार अफसाना' से जैसी की तैसी ली गई हैं।
    अलिफ लैला एक ऐसी नवयुवती की कहानी है, जिसने एक ज़ालिम बादशाह से विवाह करने के बाद न केवल उसका हृदय परिवर्तित कर दिया, अपितु अनेक नवयुवतियों का जीवन भी बचा लिया।
    इस कथा के अनुसार, बादशाह शहरयार अपनी मलिका की बेवपफाई से दुःखी होकर उसका और उसकी सभी दासियों का कत्ल कर देता है और प्रतिज्ञा करता है कि रोजाना एक स्त्री के साथ विवाह करूंगा और अगली सुबह उसे कत्ल कर दूंगा।
    3 hr 56 min
  • पौराणिक कथाएं
    किस्से-कहानियों का संसार अद्भुत है। कल्पना शक्ति का विकास करने वाली कथाएँ कहीं ना कहीं बाल मन में अच्छे गुणों के बीज भी बोती हैं। इतिहास ऐसी रोचक और शिक्षावर्धक कहानियों से भरा पड़ा है। ऐसी कहानियों को पौराणिक कथाएं (Mythological Stories) कहा जाता है।विश्व भर में कई तरह की संस्कृति व सभ्यताएं हैं और उन सभी का अपना इतिहास है। प्रत्येक सभ्यता में कुछ कहानियां इतिहास के अहम किरदारों के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं। ग्रीक, हिंदू, रोमन सभ्यता और बाइबिल की पौराणिक कथाएं काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि, इन कहानियों के पात्र वास्तविक थे या काल्पनिक, इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन ये कहानियां बच्चों के नैतिक और सामाजिक विकास में बेहतरीन भूमिका जरूर निभाती हैं। पौराणिक कथाएं संस्कृति और मानवीय मूल्य दोनों से परिचय करवाती हैं। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चे को नई जानकारियां दे सकते हैं। कभी-कभी बच्चे कहानी के किरदार को ही अपना हीरो मान लेते हैं। अपने व्यवहार में वो उन्हीं गुणों को लाने का प्रयास करते हैं, जिनकी चर्चा उन्होंने कहानियों में सुनी होती है। महान किरदारों के जीवन की घटनाएं उनके लिए प्रेरणा स्रोत बन जाती हैं।कहानियों के इस सेक्शन में ऐसी ही पौराणिक और शिक्षावर्धक कहानियां आपके बच्चों के लिए लेकर आए हैं। तो आइए, हम पौराणिक कहानियों के माध्यम से आपके बच्चों को इतिहास के महान पात्रों से मिलवाते हैं।
    
    
    नारियल के जन्म की कहानी | Nariyal Birth Story In Hindi
    
    माता शबरी की कथा | Mata Sabri Ki Katha In Hindi
    
    जितिया की व्रत कथा | Jitiya Ki Katha In Hindi
    
    नाग पंचमी की व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha In Hindi
    
    यीशु के जन्म की कहानी | Jesus Christ Birth Story In Hindi
    
    अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha In Hindi
    
    वरलक्ष्मी व्रत कथा | Varalaxmi Vrat Katha In Hindi
    
    करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi
    
    सूर्य देव की व्रत कथा |  Surya Dev Vrat Katha In Hindi
    
    होली की कथा |  Holi Mata Ki Kahani In Hindi
    
    साईं बाबा व्रत कथा |  Sai Baba Vrat Katha In Hindi
    
    गणेश जी की व्रत कथा |  Ganesh Chaturthi Vrat Katha In Hindi
    
    सत्यनारायण की व्रत कथा - द्वितीय अध्याय |  Satyanarayan Vrat Katha (Chapter 2)
    
    सत्यनारायण की व्रत कथा- प्रथम अध्याय | Satyanarayan Vrat Katha (Chapter 1)
    
    सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी) की व्रत कथा |  Saraswati Puja (Basant Panchmi) Ki Katha
    
    दशा माता की कथा | Dasha Mata Vrat Katha In Hindi
    
    वट सावित्री व्रत कथा | Vat Savitri Vrat Katha In Hindi
    
    विष्णु भगवान की व्रत कथा |  Vishnu Bhagwan Ki Katha In Hindi
    
    राम जन्म की कथा |  Ram Janam Katha In Hindi
    
    बृहस्पति व्रत कथा | Brihaspati Vrat Katha In Hindi
    
    शिव व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat Katha In Hindi
    
    सोलह सोमवार व्रत कथा | Solah Somvar Vrat Katha In Hindi
    
    सत्यनारायण की व्रत कथा - चतुर्थ अध्याय | Satyanarayan Vrat Katha (Chapter Four)
    
    राधा अष्‍टमी व्रत की कहानी  | Radha Ashtami Vrat Katha In Hindi
    
    हनुमान जी व्रत कथा | Mangalwar Vrat Katha In Hindi
    
    ब्रह्म देव की पूजा क्यों नहीं होती ? | Brahma Ji Ko Na Puje Jane Ki Kahani 
    
    तारा रानी की कथा | Tara Rani Ki Katha In Hindi
    
    तुलसी माता की व्रत कथा | Tulsi Vivah Vrat Katha In Hindi
    
    शनि व्रत कथा | Shani Dev Vrat Katha In Hindi
    
    हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi
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    किस्से-कहानियों का संसार अद्भुत है। कल्पना शक्ति का विकास करने वाली कथाएँ कहीं ना कहीं बाल मन में अच्छे गुणों के बीज भी बोती हैं। इतिहास ऐसी रोचक और शिक्षावर्धक कहानियों से भरा पड़ा है। ऐसी कहानियों को पौराणिक कथाएं (Mythological Stories) कहा जाता है।विश्व भर में कई तरह की संस्कृति व सभ्यताएं हैं और उन सभी का अपना इतिहास है। प्रत्येक सभ्यता में कुछ कहानियां इतिहास के अहम किरदारों के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं। ग्रीक, हिंदू, रोमन सभ्यता और बाइबिल की पौराणिक कथाएं काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि, इन कहानियों के पात्र वास्तविक थे या काल्पनिक, इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन ये कहानियां बच्चों के नैतिक और सामाजिक विकास में बेहतरीन भूमिका जरूर निभाती हैं। पौराणिक कथाएं संस्कृति और मानवीय मूल्य दोनों से परिचय करवाती हैं। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चे को नई जानकारियां दे सकते हैं। कभी-कभी बच्चे कहानी के किरदार को ही अपना हीरो मान लेते हैं। अपने व्यवहार में वो उन्हीं गुणों को लाने का प्रयास करते हैं, जिनकी चर्चा उन्
    1 hr 20 min
  • हिन्दी कहानियाँ और उपन्यास: किशोरीलाल गोस्वामी Hindi Stories and Novels
    किशोरी लाल गोस्वामी जी (1865 ई.-1932 ई.) का जन्म वृंदावन के एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। इनका परिवार निम्बार्क सम्प्रदाय का अनुयायी था। किशोरी लाल गोस्वामी के पितामह वृंदावन के सर्वश्रेष्ठ विद्वान् एवं आचार्य थे। किशोरी लाल गोस्वामी के नाना वाराणसी के संस्कृतज्ञ थे। इन्हीं से भारतेन्दु जी ने छन्दशास्त्र सीखा था। किशोरी लाल जी का लालन-पालन और शिक्षण इनके नाना के घर वाराणसी में हुआ। इसी कारण किशोरी लाल गोस्वामी भारतेन्दु जी के सम्पर्क में आए। 1898 ई. में किशोरी लाल गोस्वामी जी ने ‘उपन्यास’ पत्रिका निकाली जिसमें इनके उपन्यास प्रकाशित हुआ करते थे। किशोरी लाल गोस्वामी जी ‘सरस्वती’ के पंचायती सम्पादक मण्डल के सदस्य थे। उनने लगभग 65 उपन्यासों के अतिरिक्त कई कविताएं और विविध विषयों पर अपनी सिद्धहस्त लेखनी चलाई। इंदुमती और गुलबहार कहानियों के लेखक गोस्वामी जी को प्रथम कहानीकार होने का श्रेय प्राप्त है।
    इनकी मुख्य कृतियाँ हैं; उपन्यास: त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी, प्रणयिनी-परिणय, हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी, लवंगलता वा आदर्श बाला (हृदयहारिणी उपन्यास का उपसंहार), सुल्ताना रज़िया बेगम वा रंगमहल में हलाहल, गुलबहार, हीराबाई वा बेहयाई का बोरका (ऐतिहासिक उपन्यास), लावण्यमयी (बंगभाषा के आश्रय से), सुख शर्वरी (बंगभाषा के आश्रय से), प्रेममयी (बंगभाषा के आश्रय से), इंदुमती वा वनविहंगिनी (ऐतिहासिक कहानी), गुलबहार वा आदर्श भ्रातृस्नेह, तारा वा क्षात्र-कुल-कमलिनी (ऐतिहासिक उपन्यास), तरुण तपस्विनी वा कुटीर वासिनी, चंद्रावली वा कुलटा कुतूहल, जिंदे की लाश (जासूसी उपन्यास), माधवी-माधव वा मदन-मोहिनी (दो भागों में), लीलावती वा आदर्श सती, राजकुमारी, चपला वा नव्य समाज चित्र, कनक कुसुम वा मस्तानी, मल्लिका देवी वा बंग सरोजिनी, पुनर्जन्म वा सौतिया डाह, सोना और सुगंध वा पन्नाबाई, लखनऊ की कब्र वा शाही महलसरा, अँगूठी का नगीना, लाल कुँवर वा शाही रंगमहल। कविता : किशोरी सतसई, नाटक : चौपट-चपेट, मयंक मंजरी ।
    
    हिन्दी कहानियाँ और उपन्यास: किशोरीलाल गोस्वामी
    Hindi Stories and Novels : Kishorilal Goswami
    इन्दुमती
    हीराबाई वा बेहयाई का बोरका
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (1-6)
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (7-12)
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (13-17)
    किशोरी लाल गोस्वामी जी (1865 ई.-1932 ई.) का जन्म वृंदावन के एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। इनका परिवार निम्बार्क सम्प्रदाय का अनुयायी था। किशोरी लाल गोस्वामी के पितामह वृंदावन के सर्वश्रेष्ठ विद्वान् एवं आचार्य थे। किशोरी लाल गोस्वामी के नाना वाराणसी के संस्कृतज्ञ थे। इन्हीं से भारतेन्दु जी ने छन्दशास्त्र सीखा था। किशोरी लाल जी का लालन-पालन और शिक्षण इनके नाना के घर वाराणसी में हुआ। इसी कारण किशोरी लाल गोस्वामी भारतेन्दु जी के सम्पर्क में आए। 1898 ई. में किशोरी लाल गोस्वामी जी ने ‘उपन्यास’ पत्रिका निकाली जिसमें इनके उपन्यास प्रकाशित हुआ करते थे। किशोरी लाल गोस्वामी जी ‘सरस्वती’ के पंचायती सम्पादक मण्डल के सदस्य थे। उनने लगभग 65 उपन्यासों के अतिरिक्त कई कविताएं और विविध विषयों पर अपनी सिद्धहस्त लेखनी चलाई। इंदुमती और गुलबहार कहानियों के लेखक गोस्वामी जी को प्रथम कहानीकार होने का श्रेय प्राप्त है।
    इनकी मुख्य कृतियाँ हैं; उपन्यास: त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी, प्रणयिनी-परिणय, हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी, लवंगलता वा आदर्श बाला (हृदयहारिणी उपन्यास का उपसंहार), सुल्ताना रज़िया बेगम वा रंगमहल में हलाहल, गुलबहार, हीराबाई वा बेहयाई का बोरका (ऐतिहासिक उपन्यास), लावण्यमयी (बंगभाषा के आश्रय से), सुख शर्वरी (बंगभाषा के आश्रय से), प्रेममयी (बंगभाषा के आश्रय से), इंदुमती वा वनविहंगिनी (ऐतिहासिक कहानी), गुलबहार वा आदर्श भ्रातृस्नेह, तारा वा क्षात्र-कुल-कमलिनी (ऐतिहासिक उपन्यास), तरुण तपस्विनी वा कुटीर वासिनी, चंद्रावली वा कुलटा कुतूहल, जिंदे की लाश (जासूसी उपन्यास), माधवी-माधव वा मदन-मोहिनी (दो भागों में), लीलावती वा आदर्श सती, राजकुमारी, चपला वा नव्य समाज चित्र, कनक कुसुम वा मस्तानी, मल्लिका देवी वा बंग सरोजिनी, पुनर्जन्म वा सौतिया डाह, सोना और सुगंध वा पन्नाबाई, लखनऊ की कब्र वा शाही महलसरा, अँगूठी का नगीना, लाल कुँवर वा शाही रंगमहल। कविता : किशोरी सतसई, नाटक : चौपट-चपेट, मयंक मंजरी ।
    
    हिन्दी कहानियाँ और उपन्यास: किशोरीलाल गोस्वामी
    Hindi Stories and Novels : Kishorilal Goswami
    इन्दुमती
    हीराबाई वा बेहयाई का बोरका
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (1-6)
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (7-12)
    खूनी औरत का सात खून : परिच्छेद (13-17)
    इनकी मुख्य कृतियाँ हैं; उपन्यास: त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी, प्रणयिनी-परिणय, हृद
    24 min
  • गोदान (मुंशी प्रेमचन्द)
    मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880–8 अक्तूबर 1936) का जन्म वाराणसी से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फ़ारसी पढ़ने से हुआ और रोज़गार का पढ़ाने से। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा के पास करने के बाद वह एक स्थानिक पाठशाला में अध्यापक नियुक्त हो गए। 1910 में वह इंटर और 1919 में बी.ए. के पास करने के बाद स्कूलों के डिप्टी सब-इंस्पेक्टर नियुक्त हुए।उनकी प्रसिद्ध हिंदी रचनायें हैं ; उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, निर्मला, रंगभूमि, गबन, गोदान ; कहानी संग्रह: नमक का दरोग़ा, प्रेम पचीसी, सोज़े वतन, प्रेम तीर्थ, पाँच फूल, सप्त सुमन ; बालसाहित्य: कुत्ते की कहानी,
    16 hr 5 min
  • वैशाली की नगर वधू वैशाली की नगरवधू (बौद्धकालीन ऐतिहासिक उपन्यास) : आचार्य चतुरसेन शास्त्री
    यह सत्य है कि यह उपन्यास है। परन्तु इससे अधिक सत्य यह है कि यह एक गम्भीर रहस्यपूर्ण संकेत है, जो उस काले पर्दे के प्रति है, जिसकी ओट में आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय और मिश्रित जातियों की प्रगतिशील संस्कृति की विजय सहस्राब्दियों से छिपी हुई है, जिसे सम्भवतः किसी इतिहासकार ने आंख उघाड़कर देखा नहीं है।
    मैंने जो चालीस वर्षों से तन-मन-धन से
    20 hr 40 min
  • प्रस्तुत है मुंशी प्रेमचंद जी की अनमोल कहानियां।
    मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880–8 अक्तूबर 1936) का जन्म वाराणसी से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फ़ारसी पढ़ने से हुआ और रोज़गार का पढ़ाने से। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा के पास करने के बाद वह एक स्थानिक पाठशाला में अध्यापक नियुक्त हो गए। 1910 में वह इंटर और 1919 में बी.ए. के पास करने के बाद स्कूलों के डिप्टी सब-इंस्पेक्टर नियुक्त हुए।उनकी प्रसिद्ध हिंदी रचनायें हैं ; उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, निर्मला, रंगभूमि, गबन, गोदान ; कहानी संग्रह: नमक का दरोग़ा, प्रेम पचीसी, सोज़े वतन, प्रेम तीर्थ, पाँच फूल, सप्त सुमन ; बालसाहित्य: कुत्ते की कहानी, जंगल की कहानियाँ आदि।
    
    7 hr 2 min
  • लोक कथाएं
    लोककथाओं का प्रमाण मिलना मुश्किल है कि वह कहा कि है। क्योंकि ये चलती हवा सी है। जो मन को सुकून देती हैं। लेकिन जानना मुश्किल है। कि किस और से आती है।
    3 hr 56 min
  • देवकीनन्दन खत्री का रोमांचक उपन्यास (कुसुम कुमारी)
    ये उपन्यास खत्री जी द्वारा लिखे प्रेममयी उपन्यासों में से एक है। उपन्यास की शुरुआत में आप देखेंगे कि कैसे नायक को एक पत्थर की मूर्ति से प्रेम हो जाता है। दोस्ती भी दुश्मनी में बदल जाती है जब मामला प्रेम के हो एक हसीना दीवाने कई। इश्क की कहानी है ये कुसुम कुमारी भाग।
    6 hr 10 min
  • कर्नाटक की लोक कथाएं
    लोक कथाएं पहले के दशक में मनोरंजन का मुख्य साधन थी। ये कथाएं कैसे और कहां से उत्पन्न होती है परंतु जब सुनने लगों तो सब सच ही लगती है। तो आप आनंद उठाइए इन कथाओं का मेरे साथ यानी आपकी नीति के साथ
    1 hr 4 min

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