जीवन का कुछ कारोबार चले
इक सड़क से लम्बे लम्हे मे
इक डूबते से वैराग्य में
सिर्फ होठों पर ठिठकती
इक झीनी हंसी में
कुछ वेदना ढूंढे
अजीब असमंजस
सस्ती ख़ुशी समझ नहीं आती
दर्द का शूल विस्मृत
इक उदास सांस में
एक छिछली सन्तुष्टि के घूँट में
इक इठलाते अल्प विराम में
कुछ वेदना ढूंढे।
कुछ गहरा जियें
गंगा के ठंडे विस्तार सी
कोई गहरी ख़ुशी
खालिस चमकते नीले अंधरे सा
कोई गहरा दर्द
ऊपर ऊपर बहुत जिये
अब डूब कर भी जियें।