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माँ तुझे प्रणाम ( 1922 - 13/08/2011 ) - In loving memory of my mother
माँ
तुम कहाँ हो
उठते -बैठते
सोते जागते
तुम्हारी आहट सुनाई देती है !
शायद तुम आज भी पुकारती हो मुझे !
पूजाघर में तुम्हारी आहट सुनाई देती है ,
बरामदे में तुम्हारी छवि मुझे दिखाई देती है ! सीढ़ियों से उतरते तुम्हारी तस्वीर में झलकती
मुस्कुराहट
मुझे हर पल तुम्हारे साथ का
एहसास करवाती है !
वो बीत चुका बचपन ,
वो गोदी में बैठा तुम्हारी
मेरा लड़कपन ,
बहुत याद आता है !
सबकी अपनी -अपनी दुनिया है
और तुम्हारी दुनिया तो मैं था !
अब कोई और न मिला , न मिल सकता है
जो मेरी दुनिया को ही
अपना आइना कह सके !
एे माँ ! तेरी बहुत याद आती है !
एक तुम ही तो थी
जिसे मेरा रोना - चीख़ना -चिल्लाना ,
ग़ुस्से में सिर पटक कर रोना
भी कहीं
प्रेममयी लगता था !
वो तुम ही तो थी
जो क़हर बीत जाने पर
अपना धैर्य नहीं खोती थी
---" सब ठीक हो जाएगा
तू ना घबरा
तेरा हर सपना पूरा हो जाएगा ! "
देख माँ !
मेरा हर सपना पूरा हो गया ,
तेरा बेटा आज बहुत बड़ा हो गया !
पर तुम नहीं
तो सब कभी -कभी बेमानी लगता है !
मेरी हर साँस समर्पित तुम्हें !
पर वो भी बेमानी
क्योंकि अब केवल यादों में तुम्हारा साथ है !
बस तुम्हारे साथ का एहसास है
और मैं उसी एहसास के साथ जीना चाहता हूँ !!
ऐ माँ ! मेरा नमन तुम्हें !
----अश्विनी कपूर
13-08-2017
सदा से सदा के लिए
By Ashwani Kapoorमाँ तुझे प्रणाम ( 1922 - 13/08/2011 ) - In loving memory of my mother
माँ
तुम कहाँ हो
उठते -बैठते
सोते जागते
तुम्हारी आहट सुनाई देती है !
शायद तुम आज भी पुकारती हो मुझे !
पूजाघर में तुम्हारी आहट सुनाई देती है ,
बरामदे में तुम्हारी छवि मुझे दिखाई देती है ! सीढ़ियों से उतरते तुम्हारी तस्वीर में झलकती
मुस्कुराहट
मुझे हर पल तुम्हारे साथ का
एहसास करवाती है !
वो बीत चुका बचपन ,
वो गोदी में बैठा तुम्हारी
मेरा लड़कपन ,
बहुत याद आता है !
सबकी अपनी -अपनी दुनिया है
और तुम्हारी दुनिया तो मैं था !
अब कोई और न मिला , न मिल सकता है
जो मेरी दुनिया को ही
अपना आइना कह सके !
एे माँ ! तेरी बहुत याद आती है !
एक तुम ही तो थी
जिसे मेरा रोना - चीख़ना -चिल्लाना ,
ग़ुस्से में सिर पटक कर रोना
भी कहीं
प्रेममयी लगता था !
वो तुम ही तो थी
जो क़हर बीत जाने पर
अपना धैर्य नहीं खोती थी
---" सब ठीक हो जाएगा
तू ना घबरा
तेरा हर सपना पूरा हो जाएगा ! "
देख माँ !
मेरा हर सपना पूरा हो गया ,
तेरा बेटा आज बहुत बड़ा हो गया !
पर तुम नहीं
तो सब कभी -कभी बेमानी लगता है !
मेरी हर साँस समर्पित तुम्हें !
पर वो भी बेमानी
क्योंकि अब केवल यादों में तुम्हारा साथ है !
बस तुम्हारे साथ का एहसास है
और मैं उसी एहसास के साथ जीना चाहता हूँ !!
ऐ माँ ! मेरा नमन तुम्हें !
----अश्विनी कपूर
13-08-2017
सदा से सदा के लिए