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मिलापवाले तम्बू के आँगन सो हाथ लंबा था। बाइबल में, एक हाथ का माप व्यक्ति के कोहनी से लेकर उसकी ऊँगली तक की लम्बाई है, आज के समय में ४५ सेंटीमीटर। यानी की मिलापवाले तम्बू के आँगन की लम्बाई सो हाथ मतलब ४५ मीटर थी, और उसकी चौड़ाई ५० हाथ मतलब तक़रीबन २२.५ मीटर। यह उस घर का नाप था जिसमे परमेश्वर पुराने नियम में इस्राएल के लोगों के बिच में रहता था।
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हिब्रू में प्रभु का नाम याहवेह है, पारंपरिक तौर पर यहोवा, और याहवेह का मतलब होता है की जिसका अस्तित्व खुद से है, सृष्टिकर्ता जिसने पूरा ब्रह्मांड और उसके अन्दर की सारी चीजो की सृष्टि की है।
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यह युग अन्त की ओर आगे बढ़ रहा है। राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक, सब कुछ अन्त की ओर जा रहा है। विशेष रूप से, युध्ध की हवा बड़ी तेजी से फ़ैल रही है, क्योंकि महाशक्तियाँ अभी भी दुनिया के बाकी हिस्सों में अपना प्रभाव बढाने की कोशिश कराती है। मेरे घर के पास में ही, उत्तर कोरिया ने हाल ही में यह घोषित किया की, वे परमाणु हथियार बना रहे है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में खलबली मच गई है। संकट-ग्रस्त दुनिया के ऐसे समय में, मैं केवल यह आशा कर सकता हूं कि इन विवादों में शामिल हर कोई अपने सभी मुद्दों को बुद्धिमत्ता के साथ सुलझाएगा, मूर्खता में नहीं, और एक-दूसरे के साथ मिलेगा ताकि सभी एक साथ समृद्ध हो सकें।
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बाइबल में दिखाए गए अब्राहम के विश्वास का मैं बहुत ही आदर करता हूँ। जब हम अब्राहम के विश्वास की ओर देखते है, तब हम उसके विश्वास की पीड़ा को देख सकते है जो उसने यहोवा के वचन को पालन करने के लिए उठाई, इसलिए हम अब्राहम के विश्वास की सराहना करते है। परमश्वर ने अब्राहम को बहुत ही आशीषित किया था, जैस हम उत्पत्ति १२:३ में देख सकते है, जहाँ परमेश्वर कहते है, “जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूँगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूँगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएँगे।” यह महान आशीष उत्पत्ति १५:१ में भी देख सकते है, जहाँ परमेश्वर अब्राहम को घोषणा करते है, “हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल मैं हूँ।” परमेश्वर अब्राहम से विशेष प्रेम करते थे इसलिए वह उसके व्यक्तिगत परमेश्वर बन गए।
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मुख्य भाग निर्गमन १९:१-६ में पाया जाता है। हालाँकि यह भाग बहुत बड़ा नहीं है, मैं निर्गमन अध्याय १९ से २५ में प्रगट हुए सत्य को बोलना भी चाहता हूँ। इस्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीते, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए। परमेश्वर ने उन्हें सिनै पर्वत के सामने डेरा डालने के लिए कहा, और मूसा को पर्वत के ऊपर बुलाया।
इस तरह मूसा को बुलाकर, परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों से अपने वचन से बात की, “इसलिये अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे; समस्त पृथ्वी तो मेरी है। और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे।’ जो बातें तुझे इस्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।” परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को बुलाया और उन्हें उठाया उसके पीछे का कारण यह था की वह उन्हें अपना निज धन बनाना चाहते थे और अपने राज्य के लिए उन्हें याजक नियुक्त करना चाहते थे।
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उत्पत्ति के पुस्तक के अध्याय १७ में, परमेश्वर ने अब्राहम से ख़तने की वाचा बाँधी थी जो हमें आत्मिक ख़तना दिखाती है जिसके द्वारा मिलापवाले तम्बू में बलिदान के सिर पर हाथ रखने के द्वारा इस्राएलियों के सारे पाप दूर हो जाते थे और वैसे वे अपने पाप उसके ऊपर डालते थे। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर ने अब्राहम से जो वाचा बाँधी थी वह पापबलि का और होमबलि का प्रतिबिम्ब था। परमेश्वर ने ख़तने के द्वारा अब्राहम से जो वायदा किया था, की वह उसका परमेश्वर होगा और उसके वंशजों का परमेश्वर होगा, मिलापवाले तम्बू को आदर देते हुए भविष्यवाणी की गई, की अब्राहम के वंशजों को बलिदान के सिर पर हाथ रखकर अपने सारे पाप उसके सिर पर डालने होगे। हमें भी यह जानना और विश्वास करना चाहिए की यह हमें दिखाता है की नए नियम के समय में यीशु यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठाएगा।
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‘जीवन का गीत’ नाम की कविता में, हेनरी वेड्सवर्थ लॉन्गफेलो ने लिखा है, “मुझे मत समझाओ, ‘जीवन एक खाली सपना है!’”
हालाँकि, यदि आप सच में इसके बारे में सोचे, तो वास्तव में मनुष्य का जीवन बहुत ही गरीब है। हालाँकि प्रत्येक मनुष्य इस संसार में अकेले और अस्थायी जीवन जीने के बाद मिट्टी में मिल जाएगा, पृथ्वी आख़री पड़ाव नहीं है। पाप की वजह से प्रत्येक मनुष्य का आख़री पड़ाव नरक की पीड़ा होगी।
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नया जन्म पाए हुए लोगों के विश्वास और साधारण मसीही के विश्वास में स्पष्ट अन्तर है: पहले के लोग जानते है और विश्वास करते है की परमेश्वर ने हमारे सारे पापों को दूर किया है, और नए अपने खुद के विचार से यीशु पर एक धार्मिक रीति के मुताबिक़ विश्वास करते है। फिर भी जो लोग केवल धार्मिक रीति से परमेश्वर पर विश्वास करते है वे बहुत ज्यादा समृध्ध है और जो लोग सच्चे सत्य का प्रचार करते है वे इन लोगों की झूठी शिक्षाओं को और उनको समृध्ध बनते हुए देख कर निरुत्साहित होते है। वे लोग निरुत्साहित है क्योंकि वे लोग स्पष्ट रूप से जानते है की बहुत सारे मसीही लोग झूठी धार्मिक बातों में फसे है।
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मैं होमबलि की वेदी पर प्रगट हुए सत्य के बारे में बात करना चाहता हूँ। जब इस्राएल के लोग परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञा की ६१३ धाराए जो उन्हें अपने हरदिन के जीवन में पालन करना था उसमे से किसी भी एक को तोड़ते थे, और जब उन्हें अपने पापों का एहसास होता था, तब वे परमेश्वर के द्वारा तय की गई बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ निर्दोष बलि अर्पण करते थे। जिस जगह पर वे इस बलिदान को अर्पण करते थे वह ह्प्मबलि थी। दुसरे शब्दों में, इस्राएल के लोग निर्दोष बलि के सिर पर अपने हाथ रखकर, उसके गले को काटकर उसका लहू बहाकर, उस लहू को होमबलि की वेदी के शिंगो पर छिड़ककर और बचे हुए लहू को भूमि पर बहा कर, और वेदी पर बलिदान के मांस को जलाकर अपने पापों की माफ़ी पाते थे।
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सामग्री: पीतल से बना, जो हमेशा पानी से भरा हुआ रहता था।
आत्मिक अर्थ: पीतल का मतलब है मनुष्यजाति के सारे पापों का न्याय। मनुष्यजाति के सारे पापों के दोषों को सहने के लिए, यीशु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठाया। इस प्रकार, हौदी का मतलब यह है की हम यह विश्वास करने के द्वारा हमारे पापों को साफ़ कर सकते है की हमारे सारे पाप यीशु के बपतिस्मा के साथ उसके ऊपर चले गए थे।
मिलापवाले तम्बू में सेवा करनेवाले याजक भी अपनी मौत से बचने के लिए तम्बू में जाने से पहले अपने हाथ और पर हौदी में धोते थे। पीतल सारे पापों को दर्शाता है, और हौदी का पानी यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है जो यीशु ने यूहन्ना से लिया था जिसके द्वारा उसने जगत के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया था। दूसरे शब्दों में, हौदी हमसे कहती है की यीशु ने उन सारे पापों का स्वीकार किया जो उसके ऊपर डाले गए थे और इन पापों के दोष को सहा। हौदी के पानी का मतलब पुराने नियम में मिलापवाले तम्बू का नीला कपड़ा है और नए नियम में यीशु का बपतिस्मा है जो उसने यूहन्ना से लिया था (मत्ती ३:१५, १ पतरस ३:२१)।
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