Saahitya Ki Orr

मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी- चोरी


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एक क्षण बाद मैं गुड़-चबेना लेकर कोठरी से बाहर निकला। हलधर भी उसी वक्त चिउड़ा खाते हुए बाहर निकले। हम दोनो साथ - साथ बाहर आये और अपनी-अपनी बीती सुनने लगे। मेरी कथा सुखमय थी, हलधार की दुःखमय, पर अंत दोनो का एक था, गुड़ और चबेना। ऐसी कौन सी घटना है जिसका अंत लेखक के लिए सुखमय और उनके चचेरे भाई के लिए दुखमय हुआ? जानने के लिए, सुनिए ये कहानी- चोरी!!!!
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Saahitya Ki OrrBy Renu Arun