एक स्त्री जो वैधव्य के दुख से आंसू बहाती है, अचानक जब घर की जिम्मेदारी उसके उपर आती है और पूरे घर की स्वामिनी बना दी जाती है , तब वह कैसे अपने दुख को भूल उस नई जिम्मेदारी ने उसमे एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया और किस तरह वह अपना सबकुछ न्योछावर कर के भी खुश रहती है , क्योंकि वह स्वामिनी है, पूरी कहानी जानने के लिए , सुनिए ये कहानी - स्वामिनी!!!!