इस कहानी में प्रेमचंद जी ने बालकों के मनोभावों को बहुत ही सरल और अनोखे ढंग से दर्शाया है। किस प्रकार वे आपस में नोक झोंक करते हैं, फिर डरते भी हैं कि कहीं शिकायत न हो जाए। लेकिन जब उनका ही साथी जिसको उन्होंने पीटा था और वे डरे हुए थे कि कहीं वो गुरुजी से उनकी शिकायत न कर दे, लेकिन उस बालक ने अपनी समझदारी का परिचय देते हुए, किस प्रकार उनके साथ व्यवहार करता है, सुनिए - एक कहानी!!!!!