Pratidin Ek Kavita

Nasht Kuch Bhi Nahi Hota | Priyadarshan


Listen Later

नष्ट कुछ भी नहीं होता | प्रियदर्शन


नष्ट कुछ भी नहीं होता,

धूल का एक कण भी नहीं,

जल की एक बूंद भी नहीं

बस सब बदल लेते हैं रूप


उम्र की भारी चट्टान के नीचे

प्रेम बचा रहता है थोड़ा सा पानी बनकर

और अनुभव के खारे समंदर में

घृणा बची रहती है राख की तरह


गुस्सा तरह-तरह के चेहरे ओढ़ता है,

बात-बात पर चला आता है,

दुख अतल में छुपा रहता है,

बहुत छेड़ने से नहीं,

हल्के से छू लेने से बाहर आता है,


याद बादल बनकर आती है

जिसमें तैरता है बीते हुए समय का इंद्रधनुष

डर अंधेरा बनकर आता है

जिसमें टहलती हैं हमारी गोपन इच्छाओं की छायाएं


कभी-कभी सुख भी चला आता है

अचरज के कपड़े पहन कर

कि सबकुछ के बावजूद अजब-अनूठी है ज़िंदगी

क्योंकि नष्ट कुछ भी नहीं होता

धूल भी नहीं, जल भी नहीं,

जीवन भी नहीं

मृत्यु के बावजूद


...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio