वंशीधर के उद्दण्डता और विचारहीनता के बर्ताव पर अदालत ने दुःख जताया जिसके कारण एक अच्छे व्यक्ति को कष्ट झेलना पड़ा। भविष्य में उसे अधिक होशियार रहने को कहा गया। पंडित अलोपीदीन मुस्कराते हुए बाहर निकले। रुपये बाँटे गए। वंशीधर को व्यंग्यबाणों को सहना पड़ा। एक सप्ताह के अंदर कर्तव्यनिष्ठा का दंड मिला और नौकरी से हटा दिया गया। सुनिए, एक नमक के दारोगा की कहानी जिसने मानव मूल्यों को आदर्श बनाकर, कालाबाजारी के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई और इस कार्य को करते हुए उनको किस प्रकार सम्मानित किया गया, जानने के लिए सुनिए ये कहानी !!!!!