Pratidin Ek Kavita

Pehli Pension | Anamika


Listen Later

पहली पेंशन /अनामिका


श्रीमती कार्लेकर

अपनी पहली पेंशन लेकर

जब घर लौटीं–

सारी निलम्बित इच्छाएँ

अपना दावा पेश करने लगीं।


जहाँ जो भी टोकरी उठाई

उसके नीचे छोटी चुहियों-सी

दबी-पड़ी दीख गई कितनी इच्छाएँ!


श्रीमती कार्लेकर उलझन में पड़ीं

क्या-क्या ख़रीदें, किससे कैसे निपटें !

सूझा नहीं कुछ तो झाड़न उठाईं

झाड़ आईं सब टोकरियाँ बाहर

चूहेदानी में इच्छाएँ फँसाईं

(हुलर-मुलर सारी इच्छाएँ)

और कहा कार्लेकर साहब से–

“चलो ज़रा, गंगा नहा आएँ!”

...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio