Pratidin Ek Kavita

Prem | Krishna Mohan Jha


Listen Later

 प्रेम | कृष्णमोहन झा


एक माहिर चीते की तरह

अपने पंजों को दबा कर आता है प्रेम

और जबड़े में उठाकर तुम्हें ले जाता है


अगले दिन

या अगले के अगले दिन

पंजों के निशान देखती है दुनिया

लेकिन उसे

तुम्हारे टपकते रक्त का पता नहीं चलता


तुम्हें भी कहाँ पता चलता है

कि जिस जबड़े में तुम फँस गए हो अचानक

उसका नाम मृत्यु है

या है प्रेम


...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio