इस कहानी में एक कार्यालय के बाबू के जीवन को दर्शाया गया है, को अपने परिवार और दफ़्तर के बीच में पिसता तो है लेकिन कभी उफ नही करता। अपने अफसरों का हुक्म बजाता, समय पर अपने काम करता। लेकिन एक दिन ऐसा क्या हो गया कि उसके सब्र का बांध टूट गया और उसने अपने अफसर को पीट दिया? जानने के लिए, सुनिए कहानी-- इस्तीफ़ा!!!!!