पंडित सीतानाथ चौबे के पास किसी चीज की कमी न थी, वकालत अच्छी चल रही थी, सुगढ़ और निपुण जीवनसाथी , चार पुत्रों के पिता मतलब यह कि उनके पास किसी चीज की कमी न थी सिवाय उनकी कोई पुत्री न थी। इसका भी समाधान उन्होंने ढूंढ लिया अपनी पत्नी के सौतेली मां की चार वर्षीय बेटी को गोद लेकर। बहुत सुखी जिंदगी हो गई सब कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन ऐसी क्या बात हो गई कि दुर्भाग्य वश उनको अपनी गोद ली हुई बेटी से ही ब्याह करना पड़ा और इस कहानी में भूत की क्या भूमिका है, जानने के लिए सुनिए, ये कहानी- भूत!!!!?