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एक बार एक राजा को किसी ने दो अत्यंत विशिष्ट नस्ल के बाज़ उपहार में दिए ; और उन्होंने एक पक्षियों के जानकार को बुलाकर उन्हें दिए और उससे कहा कि वह उन्हें प्रशिक्षित करे। कुछ समय बाद जब वो राजा उससे मिला तो पता लगा कि एक बाज़ तो बहुत अच्छी तरह से उड़ता है, लेकिन किसी अज्ञात कारणों से दूसरा बाज़ नहीं उड़ता है। तो राजा ने चारों तरफ़ ढिंढोरा पिटवा दिया की जो भी हमारे बाज़ की समस्या का समाधान कर उसको उड़ने की शिक्षा देगा वो उसे बहुत इनाम देगा। एक व्यक्ति सामने आया और उसने दो दिन में ही उस बाज़ को उड़ना सिखा दिया। उसने क्या करा यह इस सुन्दर और प्रेरक कहानी में पू स्वामिन समतानन्द जी से सुनिए। वह शिक्षा केवल बाज़ के लिए ही नहीं बल्कि अनेकों उन इंसानों के लिए भी अत्यंत लाभकारी थी, जो अपने जीवन में ऊँची उड़ाने नहीं ले पाते हैं।
By Vedanta Ashramएक बार एक राजा को किसी ने दो अत्यंत विशिष्ट नस्ल के बाज़ उपहार में दिए ; और उन्होंने एक पक्षियों के जानकार को बुलाकर उन्हें दिए और उससे कहा कि वह उन्हें प्रशिक्षित करे। कुछ समय बाद जब वो राजा उससे मिला तो पता लगा कि एक बाज़ तो बहुत अच्छी तरह से उड़ता है, लेकिन किसी अज्ञात कारणों से दूसरा बाज़ नहीं उड़ता है। तो राजा ने चारों तरफ़ ढिंढोरा पिटवा दिया की जो भी हमारे बाज़ की समस्या का समाधान कर उसको उड़ने की शिक्षा देगा वो उसे बहुत इनाम देगा। एक व्यक्ति सामने आया और उसने दो दिन में ही उस बाज़ को उड़ना सिखा दिया। उसने क्या करा यह इस सुन्दर और प्रेरक कहानी में पू स्वामिन समतानन्द जी से सुनिए। वह शिक्षा केवल बाज़ के लिए ही नहीं बल्कि अनेकों उन इंसानों के लिए भी अत्यंत लाभकारी थी, जो अपने जीवन में ऊँची उड़ाने नहीं ले पाते हैं।