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पू स्वामिनी समतानन्द जी से एक पौराणिक प्रेरक कहानी सुनिए - जिसमे समुद्र मंथन की वे कथा सुना रही हैं। उसमे भी विशेष रूप से जब मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकलता है तो सब डर ही नहीं जाते हैं बल्कि भागने भी लगते हैं। यह विष इतना भयंकर था की वह पूरी दुनियाँ को समाप्त करके का सामर्थ्य रखता था। ऐसे में जगत-उद्धार हेतु शिवजी ही सबके लिए एक मात्र विकल्प की तरह से ज्ञात होते हैं। यहाँ शिवजी का चरित्र विशेष रूप से दृष्टव्य है की कैसे वे जगत कल्याण के लिए ह्रदय से प्रेरित थे।
By Vedanta Ashramपू स्वामिनी समतानन्द जी से एक पौराणिक प्रेरक कहानी सुनिए - जिसमे समुद्र मंथन की वे कथा सुना रही हैं। उसमे भी विशेष रूप से जब मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकलता है तो सब डर ही नहीं जाते हैं बल्कि भागने भी लगते हैं। यह विष इतना भयंकर था की वह पूरी दुनियाँ को समाप्त करके का सामर्थ्य रखता था। ऐसे में जगत-उद्धार हेतु शिवजी ही सबके लिए एक मात्र विकल्प की तरह से ज्ञात होते हैं। यहाँ शिवजी का चरित्र विशेष रूप से दृष्टव्य है की कैसे वे जगत कल्याण के लिए ह्रदय से प्रेरित थे।