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पू स्वामिनी समतानंदजी एक अत्यंत प्रेरक और प्रसिद्ध कहानी सुना रही हैं। यह कथा छान्दोग्य उपनिषद् के अंतर्गत प्राप्त होती है। इसका प्रयोजन यह दिखाना है की वर्ण व्यवस्था के पीछे व्यक्ति के गुणों के स्वरुप की प्रधानता थी।
By Vedanta Ashramपू स्वामिनी समतानंदजी एक अत्यंत प्रेरक और प्रसिद्ध कहानी सुना रही हैं। यह कथा छान्दोग्य उपनिषद् के अंतर्गत प्राप्त होती है। इसका प्रयोजन यह दिखाना है की वर्ण व्यवस्था के पीछे व्यक्ति के गुणों के स्वरुप की प्रधानता थी।