
Sign up to save your podcasts
Or


एक बार श्री आदि शंकराचार्य जी अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे तब उन्होंने देखा की एक आदमी एक गाय को रस्सी में बंधे खींचते हुए ले जा रहा था। तब उन्होंने अपने शिष्यों से पूछा की बताओ इन दोनों में स्वामी कौन है? क्या गाय बंधी है या व्यक्ति ? तब शिष्यों ने बिना हिचक के बोले की - व्यक्ति स्वामी है और गाय बंधी है। तब आचार्य ने गाय के गले से रस्सी खोल दी, और गाय भागने लगी और उसका मालिक इस घटना क्रम से स्तब्ध होकर गाय के पीछे उसको पकड़ने के लिए भागने लगा। तब आचार्य ने वो ही प्रश्न फिर से पूछा - अब बताओ की कौन किससे बंधा है? तब आचार्यश्री ने अपने शिष्यों को समझाया की वास्तविक बंधन स्थूल नहीं मानसिक होता है। कई बार हमें बहार से किसी ने नहीं पकड़ा है तब भी हम बंधे होते हैं।
By Vedanta Ashramएक बार श्री आदि शंकराचार्य जी अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे तब उन्होंने देखा की एक आदमी एक गाय को रस्सी में बंधे खींचते हुए ले जा रहा था। तब उन्होंने अपने शिष्यों से पूछा की बताओ इन दोनों में स्वामी कौन है? क्या गाय बंधी है या व्यक्ति ? तब शिष्यों ने बिना हिचक के बोले की - व्यक्ति स्वामी है और गाय बंधी है। तब आचार्य ने गाय के गले से रस्सी खोल दी, और गाय भागने लगी और उसका मालिक इस घटना क्रम से स्तब्ध होकर गाय के पीछे उसको पकड़ने के लिए भागने लगा। तब आचार्य ने वो ही प्रश्न फिर से पूछा - अब बताओ की कौन किससे बंधा है? तब आचार्यश्री ने अपने शिष्यों को समझाया की वास्तविक बंधन स्थूल नहीं मानसिक होता है। कई बार हमें बहार से किसी ने नहीं पकड़ा है तब भी हम बंधे होते हैं।