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एक चाभी वाले की दुकान में एक हथौड़ा था और बहुत सारी चाभियाँ। एक बार हथोड़े ने एक छोटी से चाभी से पूछा की 'बहन तुम इतने से जिद्दी से ताले को कैसे इतनी आसानी से खोल देती हो जबकि हमें तो बहुत सरे प्रहार करने पड़ते हैं '। तो चाभी ने कहा की तुम्हारे प्रहारों से ताला खुलता नहीं टूट जाता है, लेकिन हम ताला तोड़ते नहीं हैं बल्कि उसके अन्दर उसके हृदय में प्रवेश करते हैं और जब उससे निवेदन करते हैं तो वो स्वतः खुल जाता है।
By Vedanta Ashramएक चाभी वाले की दुकान में एक हथौड़ा था और बहुत सारी चाभियाँ। एक बार हथोड़े ने एक छोटी से चाभी से पूछा की 'बहन तुम इतने से जिद्दी से ताले को कैसे इतनी आसानी से खोल देती हो जबकि हमें तो बहुत सरे प्रहार करने पड़ते हैं '। तो चाभी ने कहा की तुम्हारे प्रहारों से ताला खुलता नहीं टूट जाता है, लेकिन हम ताला तोड़ते नहीं हैं बल्कि उसके अन्दर उसके हृदय में प्रवेश करते हैं और जब उससे निवेदन करते हैं तो वो स्वतः खुल जाता है।